Saturday, 11 February 2017

गुप्त काल

गुप्त काल(319-550 AD)

   ● बस्तर को महाकान्तर कहा जाता था।
   
   ● छत्तीसगढ़ को दक्षिणा पथ कहा जाता था।

   ● समुद्रगुप्त ने दक्षिण कोशल के राजा महेंद्रवर्मन
      को पराजित किया।

   ● समुद्रगुप्त ने नालवंशी शासक ब्याघ्रराज को  
      पराजित करने का साक्ष्य प्रयाग प्रशस्ति
       से मिलता है।

    ● मल्हार की मूर्तिकला में गुप्तकालीन विशेषताएं
        दिखाई पड़ती है।
  
    ● दुर्ग के बनाबरत से सवार्धिक सिक्के प्राप्त हुए।
   
    ● आरंग से भी गुप्तकालीन सिक्के प्राप्त होते है।

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                   राजर्षितुल्य वंश

  
          1) शूरा

          2) भीमसेन प्रथम

          3) दयित

          4) दयित -2

         5) विभीषण

         6) भीमसेन-2

 

शैल के आधार वर्गीकरण

आर्कियन शैल समूह- लगभग 50% भाग मै फैला है।

         ● संपूर्ण छत्तीसगढ़ में पाया जाता है।
         ● यह छत्तीसगढ़ में ग्रेनाइट,माइका शिष्ट,नीस के
           रूप में पाया जाता है।
        ● आद महाकल्प भी कहा जाता है ।

धारवाड़ शैल समूह--बस्तर में पाया जाने वाला लौह
          आयस्क इसी चट्टान में पाया जाता है।
       
        ●माइकाशिष्ट,क्वार्टज की अधिकता पाई जाती है

कड़प्पा शैल--छत्तीसगढ़ के मैदान में पाया जाता है ,
         चुने की प्रधानता पायी जाती है

गोंडवाना शैल-- इस शैल मै जीवाश्म होता है अतः
          कोयले की प्रधानता होती है।पूर्वी बघेल खंड
          का पठार तथा महानदी घाटी में पाया जाता है।

Monday, 6 February 2017

छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास

                   प्राचीन छत्तीसगढ़ का इतिहास

छत्तीसगढ़ के इतिहास जानने के स्रोत --      प्रशस्ति,शिलालेख,ताम्र पत्र लेख ,स्तम्भ लेख आदि के आधार पर छत्तीसगढ़ का इतिहास लिखा गया है।
            हम छत्तीसगढ़ के इतिहास को तीन भागों मै बाँट कर अध्यन करते है----
         1- प्राचीनकालीन छत्तीसगढ़ का इतिहास

         2- मध्यकालीन छत्तीसगढ़ का इतिहास

         3- आधुनिक कालीन छत्तीसगढ़ का इतिहास

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       (1)  प्राचीन छत्तीसगढ़ का इतिहास

              ■ प्रागैतिहासिक काल--- इसे पाषाण काल के नाम से भी जाना जाता है।इस काल मै पुरातत्विक वस्तुओ के आधार पर इतिहास लिखा गया है।जैसे चित्रकारी,किसी वस्तु का प्रतिरूप,खुदाई के आधार पर मिले साक्ष आदि आधार पर इतिहास को नया मोड़ मिलता है।
              इस काल को हम अध्ययन की दृष्टि से चार भागों मै बांटा गया है---
         1)--पूर्व पाषाण काल--इस काल के साक्ष रायगढ़
               के सिंघनपुर गुफा तथा महानदी घाटी। से 
               मिलता है ।

          2)--मध्य पाषाण काल --रायगढ़ के काबरा
                पहाड़ में लाल रंग की छिपकिली,कुल्हाड़ी,
                 घड़ियाल आदि के चित्र प्राप्त हुआ।
          
         3)--उत्तर पाषाण काल--रायगढ़ के महानदी घाटी
               तथा सिंघनपुर की गुफा और बिलासपुर के
                धनपुर क्षेत्र मैं।

       4)--नव पाषाण काल--राजनांदगांव- चितवाडोंगरी
             रायगढ़ के टेरम और दुर्ग के अर्जुनी। इस
            काल में लोग अस्थाई कृषि करना प्रारम्भ
             कर लिये थे।

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            वैदिक काल( 1500-600ईशा पूर्व )       

   छत्तीसगढ़ मै इस काल का कोई साक्ष्य नही मिलता।        वैदिक काल को दो भागों मै बांटा गया है -

   1)  ऋग्वैदिक काल (1500-1000ई.पु.)-कोई साक्ष्य नही मिलता।

  2)  उत्तर वैदिक काल(1000-600ई.पु.)-मान्यता है कि आर्यो का प्रवेश छत्तीसगढ़ मैं हुआ।
    ●नर्मदा नदी को रेवा नदी कहने का उल्लेख मिलता है।

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                रामायण काल

    रामायण काल--इस काल मै छत्तीसगढ़ दक्षिण कोसल का भाग था।इसकी राजधानी कुशस्थली
थी।

●भानुमंत की पुत्री कौशल्या का विवाह राजा दशरथ से हुआ।

●रामायण के अनुसार राम अपना अधिकांश समय सरगुजा के रामगढ की पहाड़ी,सीताबेंगरा की गुफा तथा लक्षमनबेंगरा की गुफा की में ब्यतीत किये।

      ● खरौद मै खरदूषण का साम्राज्य था।
 
      ● बारनवापारा (बलौदाबाजार) मै 'तुरतुरिया' बाल्मीकि आश्रम जहां लव - कुश का जन्म हुआ था।

       ● सिहावा में श्रींगी ऋषि का आश्रम था। लव- कुश का जन्म स्थल मना जाता है।

       ● शिवरीनारायण में साबरी जी ने श्रीराम जी को झूठे बेर खिलाये थे ।

       ● पंचवटी (कांकेर) से सीता माता का अपहरण होने की मान्यता है ।

       ● रामजी के पस्चात कोशल राज्य दो भागों मै बटा
           1) उत्तर कोशल-कुश का साम्राज्य
           2) दक्षिण कोशल- वर्तमान छत्तीसगढ़

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                  महाभारतकाल

     महाभारत महाकाव्य के अनुसार छत्तीसगढ़ प्राककोशल भाग था।अर्जुन की पत्नी चित्रांगदा सिरपुर की राजकुमारी थी और अर्जुन पुत्र बभ्रुवाहन की राजधानी सिरपुर था।

● मान्यता है कि महाभारत युद्ध में मोरध्वज और ताम्रध्वज ने भाग लिए थे।

●इसी काल में ऋषभ तीर्थ गुंजी जांजगीर-चाँपा आया था।

●इस काल की अन्य बातें:-

         ●सिरपुर --चित्रांगतपुर के नाम से जाना जाता है।

        ● रतनपुर को मणिपुर(ताम्रध्वज की राजधानी)

        ● खल्लारी को खल्वाटिका कहा जाता है , मान्यता है कि महाभारत का लाक्षागृह कांड यही हुआ था।भीम के पद चिन्ह (भीम खोह) का प्रमाण यही मिलता है ।

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              महाजनपद काल (राजधानी-श्रावस्ती)

      इस काल में छत्तीसगढ़ चेदि महाजनपद के अंतर्गत आता था तथा छत्तीसगढ़ को चेदिसगढ़ कहा जाता था।

● बौद्ध ग्रन्थ अवदानशतक मै ह्वेनसांग की यात्रा का वर्णन मिलता है।

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            मौर्य काल(322 ईशा पूर्व)

    छत्तीसगढ़ कलिंग देश (उड़ीसा) का भाग था।जोगीमारा की गुफा से "सुत्तनुका और देवदत्त "की प्रेम गाथा का वर्णन मिलता है।

जांजगीर चाँपा--अकलतरा और ठठारी से मौर्य कालीन सिक्के मिले।

अशोक ने सिरपुर में बौद्ध स्तुप का निर्माण करवाया था।

देवगढ़ की पहाड़ी मै स्थित सीताबेंगरा की गुफा को प्राचीनतम नाट्यशाला माना जाता है।

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       सातवाहन काल

       सातवाहन शासक ब्राम्हण जाती के थे।चंद्रपुर के बार गांव से सातवाहन काल के शासक अपिलक का शिक्का प्राप्त हुआ।

● जांजगीर चाँपा के किरारी गांव के तालाब में काष्ठ स्तम्भ शिलालेख प्राप्त हुआ।

● इस काल के मुद्रा बालपुर(जांजगीर चांपा),मल्हार और चकरबेड़ा (बिलासपुर) से प्राप्त होते है।

● इस काल के समकालिक शासक खारवेल उड़ीसा का शासक था।
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नोट:- प्रथम सदी में नागार्जुन छत्तीसगढ़ आया था।

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                 वाकाटक वंश(3-4 सताब्दी)

  राजधानी -नंदिवर्धन

प्रसिद्ध शासक--  1) महेंद्रसेन --समुद्रगुप्त के दुवारा      पराजित ।

                        2) रुद्रसेन--
                        
                        3)प्रवरसेन--चंद्रगुप्त के द्वतीय का भाठ कवी कालिदास था

                        4)नरेंद्रसेन --नालवंशी शासक भावदत्त को हराया।

                        5) पृथ्वीसेन-2--पुष्कारी को बर्बाद किया।

                         6)हरिसेन--

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                   कुषाण काल

   कनिष्क के सिक्के खरसिया (रायगढ़) से प्राप्त हुआ।

● इस काल में तांबे के सिक्के बिलासपुर से प्राप्त हुए।

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                      मेघवंश

     सिक्के मल्हार से प्राप्त हुआ ।

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               गुप्त काल(319-550 AD)

    ●इस काल में बस्तर को महाकान्तर कहा जाता था।

    ●छत्तीसगढ़ को दक्षिणा पथ कहा जाता था।

    ●

 

                   
    

राज्य का प्रतीक चिन्ह


★  4 सितंबर 2001 को स्वीकार किया गया
        ●पृष्ठठभूमी-----सफेद रंग
        ●छत्तीसगढ़ के 36 किले-----हरा रंग(राज्य की समृद्धि वन संपदा का प्रतीक)
        ● धान की बाली------ कृषि प्रधान राज्य का प्रतीक
        ●सारनाथ स्तंभ------लाल रंग
        ●ऊर्जा चिन्ह--------नीला रंग(ऊर्जा राज्य का प्रतीक)
        ●तीन लहराती रेखाएँ-------जलसंसाधन एवं नदीयों का  प्रतीक
        ●सत्यमेव जयते------राष्ट्र के प्रति सत्यनिष्ठ
        ●तिरंगा के तीन रंग------छत्तीसगढ़ का राष्ट्र के प्रति

प्राकृतिक विभाजन

प्राकृतिक विभाजन के अनुसार चार भागों में बांटा गया है

        (१)-सरगुजा बेसिन(पूर्वी बघेलखंड का पठार)

        (२)-जशपुर सामरी पाट प्रदेश

        (३)-महानदी बेसिन

        (४)-दण्डकरण्डय का पठार

(1)-सरगुजा बेसिन---इसे पूर्वी बघेलखंड का पठार भी कहा          जाता है।

           ● क्षेत्रफल--21863 वर्ग किलोमीटर

           ● शैल--गोंडवाना शैल से निर्मित

           ● अपवाह तंत्र--सोन-गंगा अपवाह तंत्र(प्रमुख नदि-                बनास,गोपथ,रिहन्द और कन्हार)

           ● मिट्टी--लाल पीली

           ● खनिज--मुख्य रूप से कोयला

           ●औसत वर्षा-- 125 से 150 सेंटीमीटर

           ●बनस्पति--उष्णकटिबंधीय आद्र शुष्क पणपाती

(2)-जशपुर सामरी पाठ प्रदेश--क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे             छोटा पाठ प्रदेश ।

           ● छोटा नागपुर के पठार का हिस्सा हैं।

           ● क्षेत्रफल--6208 वर्ग किलो मीटर

           ● भूगर्भिक बनावट-दक्कन ट्रेप से निर्मित
          
           ● औसत वर्षा--172 सेंटीमीटर

           ● वनस्पति--उष्ण आर्द्र पणपाती वन

           ● खनिज --बाक्साइड

           ● जलवायु--उष्णकटिबंधीय मानसूनी प्रकार

           ● प्रमुख पाठ--
                
               (1) -जशपुर पाठ-सबसे बड़ा पाठ

               (2)-समरी पाठ-छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची
                        
                       चोटी गौरलाटा(1225 मीटर)स्थित है।

               (3)-मैनपाठ--सरगुजा जिला मै स्थित है।

                      ● तिब्बतियों का शरण स्थल।

                      ● छत्तीसगढ़ का शिमला।

                      ● छत्तीसगढ़ का इको पॉइंट।

              (4)-पंड्रापाठ- जशपुर

              (5)-जरंगपाठ-सरगुजा

              (6)-जामीर पाठ--सरगुजा

(3)महानदी बेसिन-छत्तीसगढ़ के मैदान नाम से भी 
      जाना जाता है।

        ● क्षेत्रफल--68064

        ● कडप्पा चट्टान से निर्मित

        ● प्रमुख खनिज--चुना

        ● अन्य खनिज-डोलोमाइट,सोना,हिरा,आदि

        ● औसत ऊँचाई--330 मीटर

        ● जलवायु--उष्णकटिबंधीय मानसूनी

        ● औसत वर्षा--125 सेंटीमीटर। 

●नोट----महानदी बेसिन को दो भागों में बांटा गया है।
          
          1--पश्चिमी सीमांत उच्च भूमि-यह मैकल श्रेणि
           
               का हिस्सा है।

             ● उँची चोटी-- बादरगढ़(1176 मीटर)

             ● कवर्धा और राजनंदगांव मैं फैला हुवा है।

          2--पूर्वी सीमान्त उच्च भूमि--महासमुंद,रायगढ़

               सबसे ऊंची चोटी---शिशुपाल पहाड़ पर
              
               धारीडोंगर (899मीटर) है।

(4)--बस्तर या दण्डकरण्य का पठार--

          ● क्षेत्रफल--39060

          ● ऊँची चोटी--नंदिराज(बैलाडीला)
      
          ● वर्षा--187 सेंटीमीटर

          ● जलवायु--मानसूनी

          ● भुगर्भिक बनावट--धारवाड़,ग्रेनाइड एवं निस्स
           
             पत्थर से

नोट----1-टिक किस्म का सागौन पाया जाता है।

          2-साल वनों का द्वीप कहलाता है।

          3-गोंडों की भूमि कहलाती है।

          4- सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र अबूझमाड़ है।

          5-खनिज- लोहा , हिरा , टीन आदि पाये जाते

            है।
                                                                                

         

                                               

                       

भौगोलिक परिचय

अक्षांशीय स्थितू---17°46" से 24°05" उत्तरी                                              अक्षांश(700km)

                         80°15" से 84°25" उत्तरी                                            अक्षांश(435km)  

नोटः-------------★कर्क रेखा(23.5)°-                                                        कोरिया,सूरजपुर,बलरामपुर से गुजरती है !                         

                      ★भारतीय मानक समय रेखा (IST)

                              बलरामपुर,सूरजपुर,सरगुजा,कोरबा,जांजगीर,सूरजपुर,बलौदाबाजार,महासमुंद से गुजरता है!

Sunday, 5 February 2017

छत्तीसगढ़ के बारे में

छत्तीसगढ़ 135,194 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल के साथ भारत का दसवां बड़ा राज्य है छत्तीसगढ़ राज्य की जनसंख्या लगभग 2.55 करोड़ है इस प्रकार जनसँख्या की दृष्टि से छत्तीसगढ़ देश का सोलहवां सबसे बड़ा राज्य है छत्तीसगढ़ के लोगों की मूल भाषा छत्तीसगढ़ी है. वर्तमान छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश राज्य से अलग होकर 01 नवंबर में 2000 को अस्तित्व में आया |
छत्तीसगढ़, विद्युत् तथा स्टील के उतपादन की दृष्टि भारत का महत्वपूर्ण केंद्र है भारत में उत्पादित कुल इस्पात का लगभग 15% छत्तीसगढ़ में होता है : छत्तीसगढ़ राज्य की सीमायें सात राज्यों अर्थात मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा, झारखंड और उत्तर प्रदेश से छूती है |
छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर है जो कि मुख्यतः व्यापार, अर्थव्यवस्था, और प्रशासन का केंद्र है. छत्तीसगढ़ी राज्य में मूल रूप से प्रचलित है किन्तु प्रमुख रूप से हिन्दी ही प्रयोग होती है छत्तीसगढ़ धान का कटोरा (चावल का कटोरा अर्थ) के नाम से भी प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ राज्य की सीमायें उत्तर पश्चिम में मध्यप्रदेश, पश्चिम में महाराष्ट्र, दक्षिण में आंध्र प्रदेश, पूर्व में उड़ीसा, उत्तर पूर्व में झारखण्ड और उत्तर में उत्तर प्रदेश को छूती है |
 
 
 
 
भूगोल
छत्तीसगढ़ राज्य 17'-46‘अक्षांश से 24‘-5‘ उत्तरी अक्षांश तथा 80'-15' पूर्वी देशांतर से 84'-24' पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है छत्तीसगढ़ के उत्तरी और दक्षिणी के कुछ भाग पर्वतीय है राज्य का 44% क्षेत्र वनों से आच्छादित है |
राज्य पशु – वन भैंसा (जंगली भैंस)
राज्य पक्षी पहाड़ी मैना (हिल मैना)
राज्य वृक्ष - साल, (सराय)
परिवहन
छत्तीसगढ़ में परिवहन हेतु सड़क, रेलमार्ग एवं वायुमार्ग की सुविधा उपलब्ध है |
सड़क मार्ग: छत्तीसगढ़ में सड़कों की कुल लंबाई 45,988 है जिसमे राष्ट्रीय राजमार्गों की लम्बाई (2,184 किमी), राज्य राजमार्ग (3611 किमी), जिला सड़कें (8031 किमी) और ग्रामीण सड़कों (27,566 किमी) शामिल है |
रेलवे: छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख शहरों रेल मार्ग के माध्यम से जुड़े हुए हैं बिलासपुर में देश का 16 वां रेलवे जोन स्थापित किया गया है यहाँ के प्रमुख शहर बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव आदि रेल मार्ग के द्वारा भारत के सभी प्रमुख शहरों के साथ जुड़े हुए हैं |
वायुमार्ग: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद एअरपोर्ट से भारत के महत्वपूर्ण शहरों के लिए नियमित उड़ान सेवा उपलब्ध है |
संस्कृति
छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध है छत्तीसगढ़ में विभिन्न लोकनृत्य जैसे पंथी, सुआ,राउत नाच आदि प्रचलित है साथ ही कई आदिवासी समूहों के बीच करमा,गौर ,सरहुल आदि लोकनृत्य प्रसिद्ध |
छत्तीसगढ़ ऐतिहासिक,पुरातात्विक एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है राज्य के प्रमुख स्थलों में भोरमदेव, सिरपुर , राजिम बारसूर , तीरथगढ़ एवं चित्रकूट जलप्रपात आदि है |
छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत के परिचायक कुलेश्वर मंदिर राजिम, शिव मंदिर चन्दखुरी, सिद्धेश्वर मंदिर पलारी, आनंद प्रभु कुटी विहार और स्वास्तिक बिहार सिरपुर, जगन्नाथ मंदिर खल्लारी, भोरमदेव मंदिर कवर्धा, बत्तीसा मंदिर बारसूर और महामाया मंदिर रतनपुर सहित पुरातत्वीय दृष्टि से महत्वपूर्ण 58 स्मारक को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया हैं।
छत्तीसगढ़ के विकास के साथ ही छत्तीसगढ़ भाषा के विकास का मार्ग भी प्रशस्त किया गया है। छत्तीसगढ़ को राजभाषा का दर्जा दिया गया और छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का गठन किया गया ताकि छत्तीसगढ़ में शासकीय कामकाज हो ।
अर्थव्यवस्था
छत्तीसगढ़ की अर्तव्यवस्था मुख्यतः कृषि एवं उद्योग (उर्जा एवं इस्पात) आधारित है विगत वर्षों में छत्तीसगढ़ का आर्थिक परिदृश्य तेजी से बदला है |
छत्तीसगढ़ भारत के खनिज समृद्ध राज्यों में से एक है। यहाँ पर चूना- पत्थर, लौह अयस्क, तांबा, फ़ॉस्फेट, मैंगनीज़, बॉक्साइट, कोयला, एसबेस्टॅस और अभ्रक के उल्लेखनीय भंडार हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र भारत के बड़े इस्पात संयंत्रों में से एक है |
छ्त्तीसगढ़ उर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर है एवं देश का जीरो पॉवर कट (Zero Power Cut) राज्य है उर्जा की बढती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उर्जा के नवीन स्त्रोतों के उपयोग की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है |
पर्यटन
छत्तीसगढ़ देश का हृदय प्रदेश है एवं प्राकृतिक विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भरपूर है |
बस्तर अपनी अद्वितीय पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है. जगदलपुर के निकट कांगेर घटी क्षेत्र में, तीरथगढ़ जलप्रपात छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा जलप्रपात है दूसरी ओर भारत के नियाग्रा के नाम से प्रसिद्ध देश का सबसे चित्रकूट जलप्रपात बस्तर जिले में जगदलपुर से ४० कि.मी. की दुरी पर स्थित है |
अन्य महत्वपूर्ण स्थलों में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, केशकाल घाटी, कुटूमसर गुफाओं और कैलाश गुफाओं, आदि है जो पर्यटकों को आकर्षित करते है |
शिक्षा
जनगणना, 2011 के अनुसार, छत्तीसगढ़ में साक्षरता दर 71.04% है जो जनगणना, 2001 (64.66%) से करीब 6 प्रतिशत अधिक है |
छत्तीसगढ़ में विभिन्न उच्च शैक्षणिक संस्थाएं कार्य कर रही जिनमे हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, भारतीय प्रबंध संसथान, रायपुर, राष्ट्रीय प्रौद्योगकी संस्थान, रायपुर आदि प्रमुख है |